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झालावाड़25 मिनट पहले
जिला परिषद के सीईओ नरेंद्र सिंह राजपुरोहित की अध्यक्षता में हुई जन सुनवाई में जिले भर से करीब 38 शिकायतें सामने आई।
आम लोगों की समस्याओं की सुनवाई और उनके जल्द समाधान के लिए मिनी सचिवालय में जिला स्तरीय जन सुनवाई हुई। जिला परिषद के सीईओ नरेंद्र सिंह राजपुरोहित की अध्यक्षता में गुरुवार सुबह हुई जन सुनवाई में जिले भर से करीब 38 शिकायतें सामने आई। जन सुनवाई में अंबेडकर कॉलोनी क्षेत्र के लोगों ने ज्ञापन देकर पट्टे देने की मांग की।
जनसुनवाई में आए झालरापाटन क्षेत्र के किसान रतिराम गुर्जर ने बताया कि उसने बिजली कनेक्शन के लिए 17 अगस्त 2011 को डिमांड राशि जमा कराई। इसके एक सप्ताह बाद ट्रांसफार्मर जारी हुआ, लेकिन कृषि कनेक्शन चालू नहीं किया। इसके बाद 2018 में 48 हजार 779 रुपए का बिजली बिल जारी कर दिया। किसान ने बताया कि जब उसके कनेक्शन चालू नहीं हुआ और मीटर ही नहीं लगा तो बिल कैसे आया। मामले में मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों को मामले का निस्तारण करने के निर्देश मौके पर ही दिए गए।
बिजली विभाग से ही जुड़ा एक अन्य शिकायत आई, जिसमें शहर के मदारी खा तालाब निवासी महिला बसंती बाई पत्नी सोहनलाल ने बताया कि 2007 में 532 रुपए बिल बकाया होने पर उसके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद अब उनको 14 हजार 44 रुपए बकाया बिल जमा करने की सूचना दी जा रही हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और वह बकाया जमा कराने में सक्षम नहीं। इसके लिए मौके पर ही अधिकारी को निर्देश दिए।
झालावाड़ शहर के सुरेंद्र सोनी ने बताया कि राजकीय कामों के लिए आरक्षित जमीन पर कई जगह भू-माफियाओं ने कब्जा कर रखा है। कोई कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि अभियान केवल गरीब की झोपड़ी तक पूरा कर लिया जाता है। जन सुनवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा सूची में नाम जुड़वाने, खेत पर जाने का रास्ता खुलवाने समेत अन्य समस्याओं पर चर्चा हुई।
अनदेखी से शहर में नहीं मिल रहे पट्टे
झालावाड़ शहर की अंबेडकर कॉलोनी के लोगों ने जनसुनवाई में ज्ञापन देकर पट्टे देने की मांग की है। अंबेडकर कॉलोनी निवासी विष्णु दयाल रैगर ने दिए बताया कि अंबेडकर कॉलोनी के लिए पट्टे का मामला 2004 से लंबित चल रहा है। इस मामले में 4 बार ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन अधिकारी आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से शिविर के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को पट्टे का लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन सरकारी अधिकारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।
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