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जयपुर16 मिनट पहले
जयपुर स्थित झालाना के जंगलों में रहने वाले बंदरों में बीमारी फैल रही है। इस बीमारी के कारण बंदर चल फी नहीं पा रहे। उनके हाथ-पैर काम नहीं कर रहे। जंगल में ही मौत हो रही है। कुछ खाने के लिए देने पर बंदर उसे मुंह से पकड़ रहे हैं। हाथ-पैर नहीं हिला पा रहे। बंदरों की हालत देख आसपास के लोग भी डर रहे हैं। एक्सपर्ट की माने तो मीठी चीजें खाने से बंदरों की हालत ऐसी हुई है। जो इंसान खाने के लिए दे जाते हैं।
झालाना के जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को लग रहा है कि यह एक संक्रमण बीमारी है। इससे वह भी बीमार हो सकते हैं। इसी कारण अब लोग बंदरों को फल खिलाने में भी डर रहे हैं। मौजूदा स्थिति को देखकर अभी तक प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था होने की बात सामने नहीं आई है।
एनिमल एक्टिविस्ट-मरियम अबू हैदरी ने बताया- यह हाइपरकेराटोसिस क्रोनिक बीमारी है। जो जानवरों को मीठा देने से फैल रही हैं। इसे लेकर एनजीओ- निगम और वनविभाग को एक साथ काम करने की जरूरत हैं। डीएफओ को मेल कर दिया गया हैं। मैं खुद भी झालाना के जंगल में जाकर विजिट करूंगी। इस की एक रिपोर्ट को सरकार को भेजूंगी। बंदरों की यह स्थति बहुत बूरी हैं।
बंदरों को इनसनों के द्वारा दिए जाने वाले खाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। खासतौर पर मंदिरों के आसपास यह ज्यादा देखा गया है। मौसम बदल रहा है इस लिए इस रोग के और अधिक फैलने की सम्भावना बढा जाती हैं।
झालाना रेंज ऑफिसर जनेशवर चौधरी ने बताया- 10 दिन पहले निगम को इन बंदरों को लेकर जानकारी दे दी गई हैं। करीब एक दर्जन से अधिक बंदर इस समय संक्रमित हैं। लोगों से कई बार रिक्वेस्ट की गई कि वह मंदिर में या जंगल में किसी भी प्रकार का भोजन जानवरों को ना दे। उसके बाद भी मंदिर में आने वाले लोग जानवरों को भोजन देते हैं। ये बीमारी मीठा और पका हुआ भोजन खाने से होती हैं। कई दीवारों पर लिखवाया भी गया है, लेकिन उसके बाद भी लोग यहां जानवरों को फीड कराते हैं। निगम को लेटर दिया गया है।
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