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जयपुर40 मिनट पहलेलेखक: समीर शर्मा
चोरी के माल पर लाखों-करोड़ों का लोन…ये सुनकर आप चौंक गए होंगे। जी हां
राजस्थान पुलिस भी हैरान है। दरअसल, पुलिस ने खुद को जितना हाइटेक किया है, चोर-ठग और बदमाश उतने ही शातिर होते जा रहे हैं। इसकी बानगी कुछ दिन पहले अजमेर में देखने को मिली। ठगों ने बैंक में नकली गोल्ड गिरवी रखकर 2 करोड़ रुपए का लोन ले लिया।
ऐसा ही डबल गेम चोर-लुटेरे भी खेल रहे हैं। घरों-दुकानों से चुराया और राहगीरों से लूटा गया करोड़ों का सोना बड़े-बड़े बैंकों में ठिकाने लगा रहे हैं। फिर उस गोल्ड पर लोन उठाकर जमकर अय्याशी कर रहे हैं।
पुलिस चोरों को तो पकड़ लेती है, लेकिन जब माल बरामद करने की बारी आती है तो वो बैंक में गिरवी मिलता है। चोरी का माल रखने के जुर्म में बैंक कर्मी भी शातिर बदमाशों के गेम का शिकार हो रहे हैं।
प्रदेश में जब लगातार ऐसे केस सामने आए तो भास्कर ने पड़ताल शुरू की। हैरानी तब हुई जब पता चला कि पुलिस मुख्यालय के पास ऐसे क्राइम का रिकॉर्ड तक नहीं है। आज मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- कैसे शातिर बदमाशों का ये रैकेट काम कर रहा है?, इनका यह डबल गेम बैंक की किन कमियों से सक्सेस होता है?
सबसे पहले राजस्थान में हुईं ये वारदातें पढ़िए…।
केस-1 : तीन शातिरों ने 53 तोला सोना चुराया, फिर उठाया लोन
जयपुर के झोटवाड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई कि 13 जून, 2021 को निवारू रोड, झोटवाड़ा स्थित घर में चोर 53 तोला सोने के गहने चुराकर ले गए।
मामले की जांच झोटवाड़ा के तत्कालीन एसएचओ विक्रम सिंह ने शुरू की। सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध बदमाश नजर आए। पहचान शातिर बदमाश मोहन सिंह उर्फ मोना और मोनू सिंह के रूप में हुई। जब आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछा गया तो पता चला कि आरोपी चोरी के गहने गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखकर लोन उठा लेते थे।

जयपुर की झोटवाड़ा पुलिस कि गिरफ्त में चोर। ये शातिर नशा खरीदने के लिए चोरी करते फिर उस गोल्ड को गिरवी रखकर लोन उठाते थे।
मामला ऐसे खुला : चोरों ने पहले सोना गिरवी रखा और बैंक से कैश लेकर मौज की। इसके बाद फिर उस सोने को बैंक से छुड़ाया और दो ज्वैलर्स को बेच दिया। ज्वैलर्स को बेचे गए सोने का सुराग जब पुलिस को लगा और चोर पकड़े गए तब खुलासा हुआ कि सोने को गिरवी रख लोन भी उठाया गया है।
केस-2 : गोल्ड लोन उठाकर की ऐश
साल 2019 में बीकानेर जिले के नोखा में एक शातिर चोर ने चोरी के गहने वहां की मुथूट फाइनेंस ब्रांच में गिरवी रख करीब 4 लाख रुपए का गोल्ड लोन उठा लिया। यह खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुथूट फाइनेंस शाखा से गहने कब्जे में लिए। इसके बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक कन्हैयालाल पंचारिया ने इस मामले को लेकर चोर दीनदयाल माली के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया।
केस- 3 : चार घरों से चुराया 15 तोले सोना, बैंक में मिला
साल 2021 में कोटा की रेलवे कॉलोनी में एक ही रात में चोरी की कई वारदातें हुईं। पुलिस ने 5 बदमाशों को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पता चला कि चोरों ने 4 घरों से 11 तोले गोल्ड चुराया। फिर सारा माल आईआईएफएल गोल्ड लोन और मणप्पुरम गोल्ड लोन बैंक, भीमगंजमंडी में गिरवी रख करीब 5 लाख का लोन उठा लिया।

कोटा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। इन आरोपियों ने चुराया हुआ गोल्ड टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग गोल्ड लोन उपलब्ध करवाने वाले बैंकों में गिरवी रखा था। ताकि किसी को शक नहीं हो।
भास्कर ने जब ऐसे मामले देखे, तो सबसे पहले पुलिस अधिकारी विक्रम सिंह राठौड़ से बातचीत की, जिन्होंने चोरी के सोने को बैंक में गिरवी रख लोन उठाने के बड़े रैकेट को एक्सपोज किया था। बातचीत में सामने आया कि चोरों ने महाठगी के इस खेल के लिए बैंकों के कमजोर नियम कायदों को ही अपनी ताकत बना लिया है। साल भर पहले ऐसी चोर गैंग प्रदेश के कई जिलों में पकड़ी गई थी। सभी मामलों में एक जैसी बात सामने आई कि चोर घरों से चुराया माल गोल्ड फाइनेंस कंपनियों में गिरवी रखकर लोन उठा रहे थे।
पड़ताल में सामने आया कि गोल्ड लोन देने वाली ये बैंक महज आईडी कार्ड (वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड) पर ही सोना गिरवी रखकर लोन दे रही थी। ज्वैलरी के बिल्स चेकिंग को लेकर कोई सख्ती नहीं थी। इसी का फायदा चोरों ने उठा लिया। अभी भी ऐसे कई केस लगातार सामने आ रहे हैं।
आखिर चोर-लुटेरे चुराया गया सोना बेचने की बजाय बैंकों में गिरवी रखकर लोन क्यों उठा रहे है?
पुलिस के अनुसार जब गोल्ड ज्वैलरी की चोरी होती है, तो पूरे शहर के ज्वैलर तक सूचना पहुंचाई जाती है कि यदि कोई बिना बिल की ज्वैलरी बेचने आता है, तो पुलिस को तत्काल बताएं। ज्वैलर सचेत हो जाते हैं।
कई मामलों में ज्वैलर्स की समय पर सूचना देने के कारण चोर-लुटेरे पकड़े भी गए हैं। ऐसे में चोरों ने गोल्ड लोन लेने का रास्ता निकाला है। जब एक-दो आईडी लेकर सोने को गिरवी रखा जाता हो, तो ज्वैलर को बेचने का रिस्क क्यों उठाया जाए। कैश पैसा मिल जाता है और चोर अपने शौक पूरे करते हैं।
पुलिस के अनुसार जब चोर किसी अन्य चोरी में पकड़े जाते हैं, तब पुरानी चोरी को कबूल करते हैं। ऐसे में पता चलता है कि पुरानी चोरी के मामले में सोना बैंक में रखा है और उस पर लोन उठाया गया है।

बाजार में बेचने से नुकसान, बैंक को देने में नफा
माल ज्वैलर्स को बेचने में चोर-लुटेरों को पकड़े जाने का डर तो होता ही है, साथ ही नुकसान भी होता है। ज्वैलर्स चोरी के माल पर बहुत कम पैसे देता है। लेकिन गोल्ड पर लोन देने वाले बैंक में चोर को गोल्ड ज्वेलरी की मार्केट वैल्यू का 75 से 80 फीसदी तक पैसा मिल जाता है। ऐसे में चोर कोशिश करते हैं कि चोरी के गहने को गोल्ड लोन देने वाले बैंकों में ठिकाने लगाया जाए, ताकि कैश पैसा मिले और मुखबिरी का डर भी नहीं रहे।
बैंकों के कौन से लूपहोल हैं, जिनका फायदा चोर-लुटेरे उठा रहे हैं?
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि गोल्ड लोन प्रोवाइड कराने वाली बैंकों में सोना गिरवी रखकर लोन लेना बेहद आसान है। इसके लिए कई बैंक तो एडवरटाइजमेंट भी करवाते हैं। भास्कर ने सरकारी और बड़े निजी बैंकों से बातचीत की, तो उन्होंने अपने-अपने नियम बताए। जैसे ही चोरी के सोने पर गोल्ड लोन की घटनाओं की जानकारी देते हुए पूछा कि ऐसे कैसे गोल्ड लोन दे दिए जाते हैं, तो अधिकारियों ने ऑफिशियल कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऐसे मामले उन बैंकों में अधिक आते हैं, जो कुछ घंटों में ही गोल्ड लोन देने का दावा करती हैं। सरकारी बैंकों, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी जैसी बैंकों के जिन भी अधिकारियों से भास्कर रिपोर्टर ने बात की उन्होंने बताया कि नियम कायदों की सख्ती एवं थोड़ा समय अधिक लगने के कारण चोरी के सोने पर गोल्ड लोन लेने के मामले न के बराबर हैं।

मात्र दो आईडी प्रूफ और लोन की राशि अकाउंट में
सभी बैंकों में आधार कार्ड और पैन कार्ड देना जरूरी है। कुछ बैंक गिरवी रखे जाने वाले गोल्ड ज्वैलरी का बिल भी मांगते हैं। लेकिन जो केवल गोल्ड लोन देने के लिए प्रख्यात हैं, ऐसे बैंकों में कम वजन की गोल्ड ज्वैलरी के बिल दिखाना जरूरी नहीं है। तत्काल गोल्ड लोन देने के वादा करने वाले बैंक केवल इन दो कार्ड के आधार पर पैसा (लोन) ट्रांसफर कर देती हैं।
इसलिए नहीं देते ध्यान गोल्ड लोन देने वाले बैंक
हालांकि गोल्ड लोन देने वाले बैंकों सहित लगभग सभी बैंक अधिकारियों का मानना है कि भारतीय कल्चर में लोगों के पास पुश्तैनी गोल्ड ज्वेलरी होती हैं। इन सभी के बिल मिलना असंभव होता है। दादा-परदादा के जमाने में ज्वेलरी खरीदते या बनवाते समय बिल जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती थी। ऐसे में बिल को सेकेंडरी रख दिया जाता है।
बैंकों की इसी सोच या मजबूरी को देखते हुए बिल की अनिवार्यता नहीं रखने का फायदा चोर-लुटेरे उठाते हैं। चोर-लुटेरे चोरी या लूट के सोने को अपने आधार और पैन कार्ड के जरिए खुद के नाम पर या अपने परिचित के नाम पर बैंक से लोन उठा रहे हैं। महज आइडेंटिटी कार्ड की फोटो कॉपी देकर लोन एप्लीकेशन फॉर्म भरने के बाद गोल्ड पर लोन दिया जाता है।
एक बैंक मैनेजर ने बताया कि अधिकतर जरूरतमंद लोग ही लोन उठाते हैं। अमूमन ज्यादातर लोगों के पास अपनी पुरानी ज्वैलरी का बिल नहीं मिल पाता है। ऐसे में उनसे आईडी कार्ड की कॉपी और अंडरटेकिंग लेकर लोन दे दिया जाता है। गारंटर भी मांगा जाता है, तो लोन लेने वाले लोग अपने परिचित को गारंटर बना देते हैं।
बैंक मामलों के एक्सपर्ट और पीएनबी के पूर्व चीफ मैनेजर सतीश शर्मा ने बताया कि ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जब चोरों ने चोरी का सोना बैंक में गिरवी रखकर लोन उठाया। हालांकि जब बैंकों को ये पता चलता है, तो उनका भी नुकसान होता है। इसलिए बैंकों को लोन देते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि कस्टमर डिजर्विंग अकाउंट होल्डर हैं या नहीं।

पुलिस खुलासे के बाद पीड़ित को उसका गोल्ड मिल पाता है कि नहीं?
भास्कर टीम ने राजस्थान के दो-तीन वर्षों के चार-पांच चर्चित मामलों को लेकर जब पड़ताल की तो पता चला कि ऐसे मामलों में माल की बरामदगी में भी वीवीआईपी कल्चर हावी है। जयपुर के एक मामले में तो पीड़ित को साल भर से अपनी ज्वैलरी नहीं मिली है। पहले तो पीड़ित ने अपना दर्द बयां किया, लेकिन जब ऑफिशियल वर्जन के लिए कहा, तो पीड़ित घबरा गया। पीड़ित ने बताया कि चोरी के बाद जब चोर पकड़ा गया, तो उसने गोल्ड लोन लेना कबूला। लेकिन पुलिस ने संबंधित बैंक को नोटिस जारी किए और कुछ महीने बाद गोल्ड कोर्ट में चला गया। अब सभी गोल्ड ज्वैलरी के बिल हैं नहीं और ऐसे में अभी ज्वैलरी कोर्ट में ही है।
जब भास्कर टीम की नजर एक और मामले पर पड़ी। हालांकि ये मामला तीन साल पुराना है, लेकिन इसमें एक सप्ताह के भीतर बैंक से मालिक तक सोना पहुंच गया। पता चला कि चोर ने केवल आधार कार्ड के आधार पर मणप्पुरम गोल्ड लोन बैंक से 2 लाख रुपए से अधिक का लोन ले लिया। पीड़ित एक आईपीएस का नजदीकी था और दबाव के कारण एसएचओ ने गोल्ड को बैंक से निकालवा कर पीड़ित को सौंपा। हालांकि बैंक कर्मचारी ने बाद में चोर के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज करवाया।

क्या कहता है कानून : क्या चोरी के माल पर लोन देने पर बैंकों पर भी हो सकती है कार्रवाई?
आईपीसी की धारा 411 के तहत जो भी कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को विश्वास पूर्वक जानते हुए कि वह चोरी की संपत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करता या बरकरार रखता है, तो उसे तीन साल तक के कारावास अथवा आर्थिक दंड, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट दीपक चौहान की मानें तो अगर बैंक या लोन देने वाले कर्मियों ने ही कैजुअल तरीके से लोन दिया, तो वे भी भारतीय दंड संहिता के तहत अरोपी है।
इसी के तहत चोरी के गोल्ड पर लोन देने वाले बैंक अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में पुलिस बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करती है। कारण यह है कि चोरी का माल खरीदने वाले की मंशा अगर लालच की होती है तो उसे आरोपी बनाया जाता है, जबकि फाइनेंस कंपनी सोना गिरवी रखने वाले से सोने के स्वामित्व के बारे में अंडरटेकिंग लेती है लेकिन ठगी के खेल से अनजान होती है।

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